
नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) एक ऐसा वित्तीय संस्थान है जो बैंक लाइसेंस के बिना निवेश और एसेट फाइनेंसिंग जैसी सेवाएं प्रदान करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित ये संस्थाएं क्रेडिट अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभाती हैं। एनबीएफसी वे कंपनियां होती हैं जो ऋण, विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश, लीजिंग, हायर-परचेज और बीमा व्यवसायों के साथ जुड़े होते हैं। इनका मुख्य काम बैंकिंग प्रणाली के बाहर वित्तीय सेवाएं देना है।
भारत में अनेक प्रकार की एनबीएफसी मौजूद हैं। ये विभिन्न प्रकार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करती हैं। इनके प्रकार आप यहां नीचे देख सकते हैं:
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बैंक जमा स्वीकार करते हैं और भुगतान प्रणाली का हिस्सा होते हैं, जबकि एनबीएफसी ऐसा नहीं कर सकते और चेक जारी नहीं कर सकते हैं। बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सख्ती से विनियमित होते हैं, जबकि एनबीएफसी को अधिक लचीलापन मिलता है।
परिसंपत्ति वित्त कंपनियां ऐसी वित्तीय संस्थाएं हैं जो उत्पादक संपत्तियों को वित्तपोषित करती हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार, ये गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां हैं जिनकी आय का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संपत्ति वित्तपोषण से आता है।
भारत में सभी एनबीएफसी भारतीय रिजर्व (आरबीआई) बैंक के नियमों के तहत काम करती हैं। यह इनकी वित्तीय स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है। आरबीआई इन कंपनियों की एसेट क्वालिटी और वित्तीय स्थिरता की निगरानी करता है।
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आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 45-IA के तहत, किसी भी एनबीएफसी को परिचालन शुरू करने के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र जरूरी होता है।
आज की भारतीय अर्थव्यवस्था में NBFCs की भूमिका केवल पूरक नहीं, बल्कि अत्यंत आवश्यक बन चुकी है। चाहे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना हो, MSME सेक्टर को सशक्त करना हो या फिर तेज़ और लचीले ऋण समाधान उपलब्ध कराना; NBFCs ने पारंपरिक बैंकिंग की सीमाओं से आगे जाकर देश की विविध वित्तीय जरूरतों को पूरा किया है। RBI के सख्त विनियमन और तकनीक आधारित प्रक्रियाओं के साथ, NBFCs आज भरोसेमंद, सुलभ और ग्राहक-केंद्रित वित्तीय समाधान प्रदान कर रही हैं।
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एनबीएफसी से फिक्स्ड डिपॉजिट लेना सुरक्षित माना जाता है लेकिन आपको ऊंची क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों का चयन करना होगा। बेहतर होगा कि सिर्फ आरबीआई द्वारा पंजीकृत कंपनियों में ही निवेश करें।
एनबीएफसी होम लोन प्रदान करती हैं और यह होम लोन के लिए पसंदीदा विकल्प है। यह पारंपरिक बैंकों की तुलना में आसान पात्रता मानदंडों और न्यूनतम दस्तावेजों पर घर खरीदने के लिए ऋण देती है।
एनबीएफसी कंपनियां मुख्य रूप से जल्द और लचीले वित्तीय उत्पाद प्रदान करती हैं। इसके तहत पर्सनल लोन, बिजनेस लोन, वाहन ऋण, गोल्ड लोन, होम लोन, और एसेट फाइनेंसिंग आते हैं। साथ ही, ये फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड वितरण, बीमा सेवाएं, लीजिंग और माइक्रोफाइनेंस सेवाएं भी देती हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एनबीएफसी कंपनियों को स्केल-आधारित विनियमन ढांचे के माध्यम से रेगुलेट करता है, जो 1 अक्टूबर 2022 से ही प्रभावी है।
एनबीएफसी में निवेश साधारण तौर पर बैंकों की तुलना में थोड़ा ज्यादा जोखिम भरा होता है। हालांकि यह बेहतर रिटर्न देते हैं। उच्च रेटिंग वाली एनबीएफसी में निवेश सुरक्षित है क्योंकि वह आरबीआई द्वारा विनियमित हैं।
भारत में बजाज फाइनेंस, मुथूट फाइनेंस, टाटा कैपिटल, और चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट सबसे बड़ी एनबीएफसी कंपनियों में शामिल हैं। हीरो फिनकॉर्प एक प्रमुख और बहुत ही तेजी से बढ़ने वाली एनबीएफसी है। यह खुदरा और एमएसएमई ऋणों में पूरी तरह मजबूत होता है।
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