ECS (इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम) क्या है?

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ECS (इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित एक बहुत ही सुरक्षित डिजिटल प्रक्रिया है। यह बैंकों के बीच थोक और आवर्ती भुगतानों  को स्वचालित करती है। यह लोन EMI, यूटिलिटी बिल  या एसआईपी  जैसे भुगतानों को निर्धारित तारीख पर सीधे खाते से काटने या क्रेडिट करने की कागज रहित प्रोसेस है। 

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बैंकिंग और डिजिटल भुगतानों में ECS का प्रभाव

ECS का मतलब इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सेवा है। यह भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल भुगतान प्रणाली है। इसका इस्तेमाल बैंक खातों के बीच बड़ी मात्रा में स्वचालित और आवर्ती लेनदेन जैसे वेतन, लाभांश, ऋण ईएमआई और बिजली बिल को बिना किसी मैन्युअल बाधा के बिना किया जाता है।

वित्तीय क्षेत्र में ECS की प्रासंगिकता

यह मैन्युअल चेक जमा करने की प्रक्रिया को खत्म करता है, जिससे समय की बचत होती है। यह ईएमआई, बीमा प्रीमियम और SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) जैसे नियमित भुगतानों को निर्धारित समय पर बैंक खाते से काटता है।  

बैंकिंग और डिजिटल भुगतानों में ECS का प्रभाव

चेक की जरूरत कम होने से पेपरवर्क कम होता है। यह एक बहुत ही सुरक्षित नेटवर्क के माध्यम से काम करता है। इसमें गलतियों की गुंजाइश बहुत कम होती है। इसके अलावा समय पर ECS भुगतान से ग्राहकों की क्रेडिट रेटिंग में सुधार आता है।

ECS के प्रकार और उनका संचालन

इसके दो मुख्य प्रकार हैं-

  1. ECS क्रेडिट और ECS डेबिट
  2. ECS का संचालन

उपभोक्ता को अपने बैंक को एक ECS मैंडेट फॉर्म भरकर देना होता है। इस फॉर्म में बैंक खाते का विवरण और राशि काटने व जमा करने की अनुमति रहती है। इसके अलावा संबंधित संस्थान इस डेटा को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) या NPCI के माध्यम से रजिस्टर करता है। 


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ECS क्रेडिट: कार्यप्रणाली और उपयोग

ईसीएस क्रेडिट एक थोक, स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली है। इसका इस्तेमाल विभिन्न संस्थाएं वेतन, लाभांश, पेंशन और ब्याज जैसे भुगतान को एक साथ कई लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा करने के लिए करती हैं। यह प्रक्रिया बहुत ही तेज, सुरक्षित और पेपरलेस है।

ECS डेबिट: ऋण EMI संग्रह में उपयोग

ECS डेबिट (इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम) ऋण ईएमआई जमा करने के लिए एक स्वचालित, सुरक्षित और पेपरलेस प्रक्रिया है। यह सीधे ग्राहक के बैंक खाते से तय तारीख पर भुगतान के लिए काट लेती है।

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ECS कैसे काम करता है?

इसके लिए आपको सबसे पहले अपने बैंक को एक ECS मैंडेट फॉर्म देना होता है, जिसमें अकाउंट की डिटेल्स और ट्रांजेक्शन की अधिकतम राशि तय रहती है। इस प्रक्रिया में आप अपने बैंक को नियमित रूप से पैसे काटने की अनुमति देते हैं। ईसीएस अगर डेबिट है तो EMI के लिए राशि आपके खाते से कट जाती है। जबकि अगर ईसीएस क्रेडिट है, तो वेतन के लिए राशि सीधे आपके खाते में आ जाती है। 

ECS की मुख्य भूमिका

  • स्वचालित भुगतान: लोन की किश्तें, बीमा प्रीमियम, और SIP का नियत तारीख पर स्वतः भुगतान।
  • थोक लेनदेन: कंपनियों द्वारा वेतन, पेंशन, या डिविडेंड का एक साथ कई खातों में हस्तांतरण।
  • भुगतान में आसानी: चेक जारी करने या मैन्युअल ट्रांसफर की जरूरत को खत्म करता है।

ग्राहक अनुभव पर प्रभाव

इस प्रक्रिया में ग्राहकों को बार-बार भुगतान की तारीखें याद रखने या फिर मैन्युअल भुगतान की जरूरत नहीं पड़ती है। इस स्वचालित प्रणाली से भुगतान छूटने का खतरा कम रहता है। इसमें फिजिकल चेक या कागजी प्रोसेस की जरूरत नहीं पड़ती है।

ECS बनाम eNACH

ECS एक बहुत ही पुरानी कागजी प्रक्रिया है और इसमें 25-30 दिन का समय लगता है। जबकि eNACH पूरी तरह से डिजिटल प्रक्रिया है। यह कुछ घंटों या 1 दिन में हो जाती है।

ECS मैंडेट को कैसे रोकें

ECS मैंडेट को रोकने के लिए आप अपने बैंक के नेट बैंकिंग/मोबाइल ऐप में 'Manage Mandate' सेक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा आप बैंक शाखा में लिखित आवेदन भी जमा कर सकते हैं।

Hero FinCorp के साथ, आप कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करके या कंपनी द्वारा साझा की गई मैंडेट मैनेजमेंट प्रक्रिया का पालन करके अपने ECS मैंडेट को आसानी से मैनेज या रद्द कर सकते हैं। यह एक सरल और झंझट-मुक्त अनुभव सुनिश्चित करता है। अधिक जानकारी के लिए हमारी टीम से संपर्क करें!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न  

ECS का पूर्ण रूप और इसका अर्थ क्या है?

ECS का पूर्ण रूप इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम है। यह बैंकों द्वारा दी जाने वाली एक डिजिटल सेवा है। इसमें ऋण, ईएमआई, यूटिलिटी बिल या एसआईपी जैसे भुगतानों को स्वचालित करने के लिए एक खाते से दूसरे खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से फंड ट्रांसफर होता है।

ECS ऋण भुगतान को कैसे संसाधित करता है?

ECS ऋण भुगतान को स्वचालित प्रक्रिया से संसाधित करता है। यह प्रोसेस मैन्युअल हस्तक्षेप के बिना तय समय पर भुगतान की प्रक्रिया करती है।

ECS और NEFT में क्या अंतर है?

ECS (इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस) और NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) दोनों ही इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर के तरीके हैं। ECS का उपयोग आवर्ती भुगतानों जैसे एसआईपी, ईएमआई या लाभांश के लिए किया जाता है। वहीं NEFT का इस्तेमाल एक बैंक खाते से दूसरे में तुरंत पैसे भेजने के लिए किया जाता है।

ऋण में ECS मैंडेट फॉर्म क्या है?

ऋण में ECS मैंडेट फॉर्म एक आधिकारिक दस्तावेज है, जो बैंक को आपकी लोन की किस्त हर महीने तय तारीख पर आपके खाते से डेबिट करने की अनुमति देता है।

ECS रिटर्न शुल्क क्या हैं?

ECS रिटर्न शुल्क बैंक द्वारा लगाया जाने वाला एक प्रकार का जुर्माना है। यह जुर्माना तब लगाया जाता है जब खाते में अपर्याप्त बैलेंस या तकनीकी कारणों से लोन, एसआईपी या इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे ऑटो-डेबिट ट्रांजेक्शन फेल हो जाते हैं।

क्या ECS भुगतानों को रोकने के लिए ऑनलाइन सुविधा प्रदान करता है?

ज्यादातर बैंक ECS भुगतान को रोकने के लिए ऑनलाइन सुविधा देती है। यह काम नेट बैंकिंग या फिर मोबाइल ऐप द्वारा आसानी से किया जा सकता है। 

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Written by:

Ashavmedh Singh

Ashavmedh Singh is a Digital Product Management Expert with over 12 years of experience, with proficiency in strategy, product development, and innovation. He has a proven track record of conceptualising, developing, and scaling diverse products across industries, guiding them from inception to strong market presence.

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