
EMI का मतलब समान मासिक किश्त है, जो आपको लोन या बड़ी खरीदारी जैसे घर, कार, मोबाइल का भुगतान छोटे-छोटे और निश्चित मासिक किश्तों में करने की सुविधा देती है।
यह एक वित्तीय समाधान है जो आपको लोन चुकाने में सहायता करता है। EMI का फुल फॉर्म इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट (Equated Monthly Installment) है।
EMI का काम एक आसान फॉर्मूला के आधार पर होता है। इसके तहत आपकी प्रिंसिपल लोन की राशि को आपके लोन की इंटरेस्ट रेट (interest rate) और क्रेडिट पीरियड (repayment tenure) से विभाजित करके हर महीने एक नीयत भुगतान तय होता है।
यानी आपको निर्धारित समय पर एक तय भुगतान करना होता है, जिससे आपके लिए लोन का प्रबंधन सुविधाजनक हो जाता है और आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं।
EMI दो मुख्य हिस्सों से मिलकर बनती है:
EMI का कामकाज कैसे होता है?
इस तरह EMI लोन चुकाने की प्रक्रिया को आसान, व्यवस्थित और अनुमानित बनाती है।

EMI की गणना लोन राशि, ब्याज दर और अवधि के आधार पर की जाती है। यह प्रक्रिया यह तय करती है कि हर महीने आपको कितनी किस्त चुकानी होगी। EMI कैलकुलेशन को समझने से आप बेहतर तरीके से लोन प्लान कर सकते हैं।
EMI की गणना का फॉर्मूला:
EMI = P × R × (1+R)^N / [(1+R)^N − 1]
जहाँ:
उदाहरण:
मान लीजिए आपने ₹2,00,000 का लोन 20% वार्षिक ब्याज पर 2 साल (24 महीने) के लिए लिया।
EMI फॉर्मूला लागू करने पर, आपकी मासिक EMI लगभग ₹10,200 बनती है।
इसका मतलब है कि आप हर महीने करीब ₹10,200 चुकाएँगे, जिसमें शुरुआत में ब्याज का हिस्सा ज़्यादा होगा और धीरे-धीरे मूलधन का हिस्सा बढ़ता जाएगा।
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EMI दो प्रकार के हैं-
1. बकाया ईएमआई (मानक ईएमआई)
पहली EMI ऋण प्राप्त करने के बाद शुरू होती है। बाद में भुगतान शुरू करने के लिए यह अच्छा है।
2. अग्रिम भुगतान (ईएमआई)
उत्पाद प्राप्त होने से पहले, पहली ईएमआई का भुगतान अग्रिम रूप से किया जाता है। यह राशि आपके मूलधन को कम करने में मदद करती है। इससे कुल ब्याज दर कम करने में सहायता मिलती है।
EMI की गणना को मुख्य रूप से लोन राशि (मूलधन), ब्याज दर (ब्याज की दर), और लोन अवधि (अवधि) प्रभावित करते हैं।
EMI हर उधारकर्ता के लिए अलग-अलग हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसकी गणना कुछ महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है। इन कारकों को समझने से आप अपनी EMI को बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं और लोन लेते समय सही निर्णय ले सकते हैं।
EMI को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक:
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आज EMI भारत में होम लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और NBFC लोन का अहम हिस्सा है। यह बड़े खर्चों को आसान मासिक भुगतानों में बाँटकर बजट संतुलित रखने और क्रेडिट प्रोफ़ाइल मजबूत करने में मदद करती है।
और जब कभी किसी ज़रूरत या योजना के लिए अतिरिक्त फंड की आवश्यकता हो, तो एक आसान और स्पष्ट प्रक्रिया बहुत मायने रखती है। Hero FinCorp पर्सनल लोन आवेदन को पूरी तरह डिजिटल और सरल रखता है, ताकि आप बिना जटिलताओं के सही निर्णय ले सकें।
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1. फ्लैट ब्याज विधि
ब्याज पूरे ऋण अवधि के लिए कुल ऋण पर लगता है।
सूत्रः ईएमआई = (मूलधन + कुल ब्याज) महीनों की संख्या
2. अवनत शेष विधि
सूत्रः EMI = [मूलधन x मासिक ब्याज दर x (1+मासिक ब्याज दर)^किश्तों की संख्या] + [(1+मासिक ब्याज दर)^किश्तों की संख्या-1]
इसकी भूमिका यह है कि यह लोन चुकाने का एक निश्चित, प्रबंधनीय तरीका है। इसमें हर महीने एक तय राशि (मूलधन + ब्याज) चुकाई जाती है।
EMI की सुविधा हर तरह के ऋण पर लागू नहीं होती है।
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