
नो ड्यूज़ सर्टिफिकेट एक आधिकारिक दस्तावेज़ होता है जो यह प्रमाणित करता है कि आपने किसी बैंक या संस्था का पूरा बकाया चुका दिया है। यह लोन क्लोजर के बाद दिया जाता है और भविष्य में किसी भी विवाद से बचाने में मदद करता है।

क्या आपने कभी UPI का प्रयोग पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया है? आपका उत्तर शायद हाँ ही होगा, क्योंकि आज के डिजिटल समय में मोबाइल बैंकिंग और UPI पेमेंट हमारी रोज़मर्रा का हिस्सा बन चुके हैं। मोबाइल पेमेंट जितना आरामदायक है, उतना ही यह कई तरह के ऑनलाइन रिस्क से भी भरा होता है।ऐसे में MPIN एक सुरक्षा कवच की तरह हमारी वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित रखता है। तो चलिए जानते हैं कि MPIN क्या है और MPIN generate और सुरक्षित कैसे रखें।

अगर आपने किसी तरह का लोन लिया है या फिर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो ऐसे मैसेज आने पर डरें नहीं। ऐसा तब होता है जब हमसे कोई EMI मिस हो जाती है या फिर हम अपना क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर भर नहीं पाते। ऐसे में ये मैसेज वित्तीय संस्था या बैंक द्वारा एक रिमाइंडर है कि हम अपना अतिदेय या ओवरड्यू पेमेंट जल्दी करें।

Rajnish is a salaried professional in Pune. He applied for a personal loan to cover a medical emergency. All his documents were in place, displaying his steady income and stable job. Still, his application faced delays. When he checked his credit report, he noticed a ‘settled loan account’.

Rajkumar has a growing logistics startup in Pune that needs delivery vans. He has two options: either buy the vehicles through a finance lease or use them temporarily through an operating lease. Both options allow him to use the assets without paying the full purchase price.

प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) एक ऐसा डिजिटल या फिजिकल माध्यम है जो सामानों की खरीद, नकद निकासी या फंड ट्रांसफर के लिए पहले से जमा राशि का इस्तेमाल करते हैं। यह कार्ड या फिर मोबाइल वॉलेट हो सकते है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा विनियमित, यह डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित और आसान बनाता है।

नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) यानी बैंकों द्वारा दिए गए वे ऋण जिनका ब्याज या मूलधन 90 दिनों से अधिक समय तक न चुकाया गया हो। इसके माध्यम से बैंक के लिए आय बंद हो जाता है, जिससे लाभप्रदता कम होती है और बैलेंस शीट कमजोर हो जाती है। होती है। एनपीए को सब-स्टैंडर्ड, डाउटफुल और लॉस एसेट्स में विभाजित किया जाता है। एनपीए मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते हैं। जैसे सब-स्टैंडर्ड (12 महीने तक एनपीए), संदिग्ध (12 महीने से अधिक) और लॉस एसेट (वसूली योग्य नहीं)।

जब आप पहले से कोई लोन ले चुके हों और उसकी EMI नियमित रूप से भर रहे हों, तब उसी मौजूदा लोन के ऊपर अतिरिक्त राशि लेने की सुविधा को टॉप-अप लोन कहते हैं। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे आपके मोबाइल में balance खत्म हो जाए और आप recharge करा लें, बिना नया नंबर लिए।
A loan application is assessed not only on an income basis but also on previous lending behaviour. Before loans are given or interest charged, lenders consider extensive credit history.
This data is provided by a credit agency that maintains records of borrowing and repayment behaviour. To determine how lenders evaluate creditworthiness and decide whether to approve or deny a loan, it makes sense to understand credit bureaus.