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NBFC क्या है-अर्थ, प्रकार और यह कैसे काम करती है

NBFC क्या है

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) एक ऐसा वित्तीय संस्थान है जो बैंक लाइसेंस के बिना निवेश और एसेट फाइनेंसिंग जैसी सेवाएं प्रदान करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विनियमित ये संस्थाएं क्रेडिट अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभाती हैं। एनबीएफसी वे कंपनियां होती हैं जो ऋण, विभिन्न प्रतिभूतियों में निवेश, लीजिंग, हायर-परचेज और बीमा व्यवसायों के साथ जुड़े होते हैं। इनका मुख्य काम बैंकिंग प्रणाली के बाहर वित्तीय सेवाएं देना है।

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एनबीएफसी के प्रकार

भारत में अनेक प्रकार की एनबीएफसी मौजूद हैं। ये विभिन्न प्रकार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करती हैं। इनके प्रकार आप यहां नीचे देख सकते हैं:

  1. एसेट फाइनेंस कंपनी
  2. निवेश कंपनी
  3. लोन कंपनी
  4. इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी
  5. सूक्ष्म वित्त संस्थान
  6. हाउसिंग फाइनेंस कंपनी
  7. कोर निवेश कंपनी
  8. इंफ्रास्ट्रक्चर डेट फंड
  9. फैक्टर, आदि

एनबीएफसी क्या और कैसे काम करती है?

  1. फंड जुटाना (Raising Funds) -एनबीएफसी बैंक की तरह ग्राहकों से पैसे जमा नहीं लेती है। यह बैंकों से लोन, बॉन्ड/डिबेंचर जारी करके, म्यूचुअल फंड, विदेशी निवेश या इक्विटी कैपिटल के माध्यम से फंड जुटाने का काम करती है। इसके बाद यह इस फंड से आगे लोन देती है।
  2. लोन प्रदान करना (Providing Loans) - एनबीएफसी पर्सनल लोन, बिज़नेस लोन, व्हीकल लोन, होम लोन, माइक्रोफाइनेंस आदि कई तरह के लोन देने का काम करती है। यह उन लोगों को लोन देती है जिन्हें बैंकों से लोन लेना मुश्किल होता है।
  3. लाभ कमाना (Earning Revenue & Profit) -एनबीएफसी के आय का मुख्य स्रोत लोन से आने वाला ब्याज है। साथ ही, प्रोसेसिंग फीस, लेट फीस, प्री-पेमेंट चार्ज आदि के रूप में भी इनकम होता है।
  4. विनियमन करना (Regulation & Control) - एनबीएफसी मुख्य रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नियंत्रित होता है। एनबीएफसी के लिए आरबीआई के नियम मानना अनिवार्य होता है।

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बैंक और एनबीएफसी में अंतर

बैंक जमा स्वीकार करते हैं और भुगतान प्रणाली का हिस्सा होते हैं, जबकि एनबीएफसी ऐसा नहीं कर सकते और चेक जारी नहीं कर सकते हैं। बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सख्ती से विनियमित होते हैं, जबकि एनबीएफसी को अधिक लचीलापन मिलता है।

परिसंपत्ति वित्त कंपनियां

परिसंपत्ति वित्त कंपनियां ऐसी वित्तीय संस्थाएं हैं जो उत्पादक संपत्तियों को वित्तपोषित करती हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार, ये गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां हैं जिनकी आय का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संपत्ति वित्तपोषण से आता है।

निवेश कंपनियां

  • बजाज फिनसर्व
  • आदित्य बिड़ला कैपिटल
  • टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन
  • चोला फाइनेंशियल
  • टीव्हीएस होल्डिंग्स
  • JM फाइनेंशियल

इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनियां

  • इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड
  • श्रेयी इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड
  • इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कंपनी

प्रमुख भारतीय माइक्रोफाइनेंस संस्थान

  • बंधन बैंक
  • क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण लिमिटेड
  • स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल लिमिटेड
  • उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक
  • भारत फाइनेंशियल इन्क्लूजन लिमिटेड

भारतीय अर्थव्यवस्था में NBFC की मुख्य भूमिकाएं

  • वित्तीय समावेशन
  • एमएसएमई और बुनियादी ढांचे को वित्तपोषण
  • लचीली और तेज ऋण प्रक्रिया
  • बचत और निवेश को बढ़ावा
  • विदेशी निवेश का अवसर

भारतीय अर्थव्यवस्था में एनबीएफसी की भूमिका

भारत में सभी एनबीएफसी भारतीय रिजर्व (आरबीआई) बैंक के नियमों के तहत काम करती हैं। यह इनकी वित्तीय स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है। आरबीआई इन कंपनियों की एसेट क्वालिटी और वित्तीय स्थिरता की निगरानी करता है।

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आरबीआई द्वारा एनबीएफसी का विनियमन

आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 45-IA के तहत, किसी भी एनबीएफसी को परिचालन शुरू करने के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र जरूरी होता है।

एनबीएफसी के फायदे

  • त्वरित और आसान ऋण
  • लचीलापन
  • विशिष्ट सेवा
  • ग्रामीण पैठ

एनबीएफसी की चुनौतियां

  • उच्च लागत
  • परिचालन लागत
  • तरलता और फंडिंग
  • जोखिम और नियम

निष्कर्ष

आज की भारतीय अर्थव्यवस्था में NBFCs की भूमिका केवल पूरक नहीं, बल्कि अत्यंत आवश्यक बन चुकी है। चाहे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना हो, MSME सेक्टर को सशक्त करना हो या फिर तेज़ और लचीले ऋण समाधान उपलब्ध कराना; NBFCs ने पारंपरिक बैंकिंग की सीमाओं से आगे जाकर देश की विविध वित्तीय जरूरतों को पूरा किया है। RBI के सख्त विनियमन और तकनीक आधारित प्रक्रियाओं के साथ, NBFCs आज भरोसेमंद, सुलभ और ग्राहक-केंद्रित वित्तीय समाधान प्रदान कर रही हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या एनबीएफसी से फिक्स्ड डिपॉजिट लेना सुरक्षित है?

एनबीएफसी से फिक्स्ड डिपॉजिट लेना सुरक्षित माना जाता है लेकिन आपको ऊंची क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों का चयन करना होगा। बेहतर होगा कि सिर्फ आरबीआई द्वारा पंजीकृत कंपनियों में ही निवेश करें।

क्या एनबीएफसी हाउसिंग लोन भी प्रदान करती हैं?

एनबीएफसी होम लोन प्रदान करती हैं और यह होम लोन के लिए पसंदीदा विकल्प है। यह पारंपरिक बैंकों की तुलना में आसान पात्रता मानदंडों और न्यूनतम दस्तावेजों पर घर खरीदने के लिए ऋण देती है।

एनबीएफसी द्वारा कौन से मुख्य वित्तीय उत्पाद ऑफर किए जाते हैं?

एनबीएफसी कंपनियां मुख्य रूप से जल्द और लचीले वित्तीय उत्पाद प्रदान करती हैं। इसके तहत पर्सनल लोन, बिजनेस लोन, वाहन ऋण, गोल्ड लोन, होम लोन, और एसेट फाइनेंसिंग आते हैं। साथ ही, ये फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड वितरण, बीमा सेवाएं, लीजिंग और माइक्रोफाइनेंस सेवाएं भी देती हैं।

RBI NBFCs को कैसे रेगुलेट करता है?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एनबीएफसी कंपनियों को स्केल-आधारित विनियमन ढांचे के माध्यम से रेगुलेट करता है, जो 1 अक्टूबर 2022 से ही प्रभावी है।

क्या NBFC में निवेश करना बैंकों जितना सुरक्षित है?

एनबीएफसी में निवेश साधारण तौर पर बैंकों की तुलना में थोड़ा ज्यादा जोखिम भरा होता है। हालांकि यह बेहतर रिटर्न देते हैं। उच्च रेटिंग वाली एनबीएफसी में निवेश सुरक्षित है क्योंकि वह आरबीआई द्वारा विनियमित हैं।

भारत में सबसे बड़ी NBFCs कौन-सी हैं (HeroFincorp की स्थिति)?

भारत में बजाज फाइनेंस, मुथूट फाइनेंस, टाटा कैपिटल, और चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट सबसे बड़ी एनबीएफसी कंपनियों में शामिल हैं। हीरो फिनकॉर्प एक प्रमुख और बहुत ही तेजी से बढ़ने वाली एनबीएफसी है। यह खुदरा और एमएसएमई ऋणों में पूरी तरह मजबूत होता है।

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