
टर्म लोन एक निश्चित राशि का ऋण है जो बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा एक पूर्व-निर्धारित अवधि और ब्याज दर पर एकसाथ दिया जाता है। इसे आप निर्धारित समय में या मासिक, तिमाही या वार्षिक किश्तों में चुका सकते हैं। इसका उपयोग आमतौर पर दीर्घकालिक निवेश के लिए किया जाता है। इस तरह के लोन लेने से उधारकर्ता को पूरी रकम एक बार में ही दे दी जाती है। इसके बाद उसे हर महीने निश्चित रकम किश्तों में लौटाना पड़ता है जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों सम्मिलित रहते हैं।

टर्म लोन मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।
टर्म लोन एक निश्चित अवधि और ब्याज दर के साथ मिलने वाला ऋण है। इसे EMI के माध्यम से चुकाया जाता है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि यह निश्चित अवधि के लिए दिया जाता है। उधार लेने वाले व्यक्ति को एकमुश्त रकम मिल जाती है। इसके बाद वह पूर्व-निर्धारित ईएमआई चुकाता है। इस तरह के लोन बिजनेस को विस्तार देने या बड़ी खरीदारी करने के लिए उपयुक्त होते हैं।
टर्म लोन एक निश्चित समय के लिए बैंक या वित्तीय संस्थान से ली गई राशि है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैंः
टर्म लोन पाने के लिए आमतौर पर आवेदक की आयु 21-65 वर्ष, अच्छा सिबिल स्कोर (750+), नियमित आय का स्रोत और भारतीय नागरिक होना जरूरी है।
टर्म लोन आमतौर पर वे व्यक्ति, स्व-रोजगार पेशेवर और व्यावसायिक इकाइयाँ ले सकते हैं जिन्हें एक निश्चित समय के लिए एकमुश्त राशि की जरूरत होती है। वे शर्तों के अनुसार बिना किसी रुकावट के लोन की किश्तें भर सकते हैं।
टर्म लोन को एक पूर्व-निर्धारित समय में निश्चित मासिक किस्तों के माध्यम से ब्याज सहित वापस चुकाना पड़ता है। इसमें 1 से 10 वर्ष या फिर उससे अधिक की अवधि और निश्चित या परिवर्तनशील ब्याज दरें होती हैं।
टर्म लोन की ब्याज दरें आम तौर पर 10.50 प्रतिशत प्रति वर्ष से शुरू होकर 27 प्रतिशत या उससे अधिक तक हो सकती है।
टर्म लोन के लिए सामान्य रूप से आवश्यक दस्तावेजों की बात करें तो - भरा हुआ आवेदन फॉर्म, पासपोर्ट साइज फोटो, पैन कार्ड, आधार कार्ड, पिछले 6-12 महीने का बैंक स्टेटमेंट और पिछले 2-3 साल का ITR व ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट शामिल हैं।

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टर्म लोन के लिए आवेदन प्रक्रिया में बैंक/NBFC की वेबसाइट या शाखा के माध्यम से आवेदन करना, आवश्यक दस्तावेज जमा करना और योग्यता पूरी करना शामिल है।
टर्म लोन की स्वीकृति मुख्य रूप से क्रेडिट स्कोर, स्थिर आय, काम का अनुभव और उम्र पर निर्भर करती है।
टर्म लोन एक निश्चित अवधि के लिए ली गई एकमुश्त राशि है। इसमें स्थिर EMI होती है, जो दीर्घकालिक निवेश (मशीनरी, विस्तार) के लिए आदर्श है। वहीं इसके विपरीत क्रेडिट लाइन या फ्लेक्सी लोन में लचीली निकासी और उपयोग की गई राशि पर ही ब्याज लगता है। यह लोन अल्पकालिक जरूरतों के लिए बेहतर है। टर्म लोन में आमतौर पर कम ब्याज दरें होती हैं।
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टर्म लोन की EMI (समान मासिक किश्त) की गणना एक विशिष्ट फॉर्मूले के आधार पर की जाती है।
EMI = [P × R × (1+R)^N] / [(1+R)^N – 1]
यहाँ, P = लोन की मूल राशि, R = मासिक ब्याज दर, N = कुल महीनों की संख्या है।
आपको बता दें कि अधिकांश व्यवसाय अपने दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सावधि ऋण का विकल्प चुनते हैं। एक निश्चित अवधि के लिए व्यवसाय द्वारा टर्म लोन लिया जाता है। इसे नियमित किस्तों में चुकाया जाता है। इस तरह के लोन की अवधि 3 से 20 वर्ष तक हो सकती है। ब्याज दर निश्चित या फिर कई बार परिवर्तनशील भी हो सकती है।
टर्म लोन (सावधि ऋण) की सामान्य अवधि साधारण तौर पर 1 से 5 वर्ष या फिर उससे अधिक (25 वर्ष तक) हो सकती है। टर्म लोन यह ऋण के प्रकार (अल्पकालिक, मध्यम, या दीर्घकालिक) पर निर्भर करती है। व्यावसायिक टर्म लोन के लिए, अवधि आमतौर पर 1 से 10 वर्ष के बीच होती है, जो मुख्य रूप से उपकरण खरीदने या फिर किसी व्यवसाय के विस्तार के लिए लिया जाता है।
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लोन कई वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का एक प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता समय पर पुनर्भुगतान में छिपी होती है। लोन को समय पर या उससे पहले चुकाने के फायदे केवल ऋण समाप्त करने तक सीमित नहीं हैं। इससे आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर हो सकता है, ब्याज लागत कम हो सकती है और भविष्य की वित्तीय योजनाओं को अधिक मजबूती मिल सकती है। चाहे आप नियमित EMI का भुगतान करें या लोन का प्रीपेमेंट करें, दोनों ही विकल्प आपकी वित्तीय सेहत को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रेमिटेंस का अर्थ मान लीजिए नेहा मुंबई में काम करती है और हर महीने अपने परिवार को पैसे भेजती है। इसी प्रक्रिया को रेमिटेंस कहा जाता है, यानी एक स्थान से दूसरे स्थान पर पैसा भेजना। यह पैसा व्यक्ति, परिवार, बैंक या व्यवसाय को देश के अंदर या विदेश में भेजा जा सकता है। रेमिटेंस में इसे "धन प्रेषण" या "पैसा भेजना" कहते हैं।

रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, वाणिज्यिक बैंकों से उनकी अतिरिक्त नकदी जमा करने पर उसके बदले ब्याज देता है। यह रेपो रेट से अलग होता है। यह वह दर है जिस पर बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से लोन लेते हैं। रिवर्स रेपो का इस्तेमाल अर्थव्यवस्था में पैसा कम करने के लिए किया जाता है, जबकि रेपो रेट का इस्तेमाल इसे नियंत्रित या बढ़ाने के लिए होता है।