Loading...

नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) - अर्थ, वर्गीकरण और प्रकार

Finance Tips09 April 2026Ashavmedh Singh581
नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) - अर्थ

नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) यानी बैंकों द्वारा दिए गए वे ऋण जिनका ब्याज या मूलधन 90 दिनों से अधिक समय तक न चुकाया गया हो। इसके माध्यम से बैंक के लिए आय बंद हो जाता है, जिससे लाभप्रदता कम होती है और बैलेंस शीट कमजोर हो जाती है। होती है। एनपीए को सब-स्टैंडर्ड, डाउटफुल और लॉस एसेट्स में विभाजित किया जाता है। एनपीए मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते हैं। जैसे सब-स्टैंडर्ड (12 महीने तक एनपीए), संदिग्ध (12 महीने से अधिक) और लॉस एसेट (वसूली योग्य नहीं)।

नॉन-परफॉर्मिंग एसेट

To Avail Personal LoanApply Now

एनपीए क्या होता है? - पूरी जानकारी

एनपीए का मतलब ऐसे लोन या एडवांस से है, जिस पर ब्याज या मूलधन की अदायगी 90 दिनों से अधिक समय तक नहीं की गई है। यह बैंक द्वारा दिया गया वह कर्ज है जो वापस नहीं आ रहा है। बैंकिंग की भाषा में इसे खराब कर्ज भी कहा जाता है।

एनपीए की फुल फॉर्म और महत्व

एनपीए का फुल फॉर्म नॉन-परफॉर्मिंग एसेट यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति है। एनपीए एक ऐसा ऋण या अग्रिम जिन पर 90 दिनों से अधिक समय तक मूलधन या ब्याज का भुगतान नहीं हुआ है। यह बैंक के लिए आय (इनकम) बंद कर देता है। 

एनपीए के प्रकार

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) को तीन मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है। इनके नाम हैं, सबस्टैंडर्ड (अवमानक), डाउटफुल (संदेहपूर्ण) और लॉस एसेट (हानि परिसंपत्तियां)।

एनपीए कैसे काम करता है?

एनपीए बैंक द्वारा दिया गया ऐसा लोन जिस पर 90 दिनों से अधिक समय तक ब्याज या मूलधन का भुगतान नहीं किया गया है। आपको बता दें कि जब कोई उधारकर्ता समय पर किस्त नहीं भरता है तो वह लोन बैंक की आय बंद कर देता है। इस कारण इसे खराब ऋण माना जाता है, जो बैंक की आय स्थिरता को कम करता है।

साथ ही पढ़ें- लोन एग्रीमेंट क्या है? इसकी आवश्यकता, महत्व और मुख्य शर्तें जानें

एनपीए की गणना और रेशियो

एनपीए की गणना 'सकल एनपीए' के रूप में कुल डिफॉल्ट ऋण के रूप में होती है। वहीं, 'नेट एनपीए' प्रावधानों को घटाकर वास्तविक नुकसान को प्रदर्शित करता है। उच्च NPA रेशियो बैंक की खराब वित्तीय स्थिति और खतरे को दर्शाता है।

साथ ही पढ़ें - साधारण ब्याज क्या है?

एनपीए के कारण

एनपीए के मुख्य कारणों में आर्थिक मंदी, कॉरपोरेट घरानों द्वारा ऋण की अदायगी न करना और बैंकिंग नियमों में लापरवाही शामिल है। साथ ही जानबूझकर चूक, प्राकृतिक आपदाएं और खराब ऋण निगरानी भी एनपीए में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है।

एनपीए का बैंकिंग और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

एनपीए का बैंकिंग और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

एनपीए बैंकिंग प्रणाली के लिए एक गंभीर संकट है, जो सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को धीमा कर देता है। यह बैंकों के लाभ और नकदी को कम करता है। इसकी वजह से नए ऋण देने की क्षमता घट जाती है। जिसके बाद निवेश में कमी, ब्याज दरों में वृद्धि और बेरोजगारी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

साथ ही पढ़ें - कंपाउंड ब्याज - कंपाउंडिंग का अर्थ, फॉर्मूला

एनपीए प्रबंधन

एनपीए प्रबंधन बैंकों द्वारा 90 दिनों से अधिक बकाया ऋणों की वसूली और जोखिम कम करने की प्रक्रिया है। इसमें IBC (दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता), लोक अदालत, ऋण पुनर्गठन (Restructuring) और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) के माध्यम से रिकवरी व सख्त निगरानी शामिल है।

एनपीए से बचाव के उपाय

एनपीए से बचाव के लिए ऋण देने से पहले कठोर मूल्यांकन, उधारकर्ता के साख की जांच, नियमित निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है। साथ ही वसूली के लिए SARFAESI अधिनियम, लोक अदालत, दिवालियापन संहिता (IBC) और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARCs) का इस्तेमाल बचाव के उपाय हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

एनपीए क्या होता है?

एनपीए या गैर-निष्पादित संपत्ति बैंक का वह ऋण या एडवांस है, जिस पर 90 दिनों से अधिक समय तक ब्याज या मूलधन का भुगतान नहीं किया गया है। 

एनपीए कब घोषित होता है?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार, जब किसी लोन की ईएमआई, ब्याज या मूलधन की अदायगी लगातार 90 दिनों से अधिक समय तक नहीं होती है तो उसे एनपीए या 'फंसा हुआ कर्ज' घोषित कर दिया जाता है। 

एनपीए के प्रकार कौन-कौन से हैं?

एनपीए मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, जैसे सब-स्टैंडर्ड (12 महीने तक), डाउटफुल (12 महीने से अधिक), और लॉस एसेट्स (वसूली योग्य नहीं)। 

एनपीए का बैंक की वित्तीय स्थिति पर क्या प्रभाव होता है?

एनपीए बैंक की वित्तीय स्थिति को कमजोर करते हैं। इससे बैंक का आय घटता है, पूंजी की कमी हो जाती है और ऋण देने की क्षमता कम जाती है। यह सीधे बैंक की लाभप्रदता, नकदी और बाजार में छवि (साख) को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसकी वजह से बैंक दिवालियापन की स्थिति तक पहुंच सकते हैं।

अस्वीकरण: यहाँ प्रदान की गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यद्यपि हम सटीक और अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं, फिर भी यात्रा की परिस्थितियाँ, मौसम, घूमने के स्थान, यात्रा कार्यक्रम, बजट और परिवहन विकल्प समय के साथ बदल सकते हैं। पाठकों को यात्रा से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से विवरण की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है। इस ब्लॉग में साझा की गई जानकारी के उपयोग से उत्पन्न किसी भी असुविधा, हानि, चोट या नुकसान के लिए हम उत्तरदायी नहीं होंगे। यात्रा में अंतर्निहित जोखिम होते हैं, इसलिए पाठकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सुझावों को लागू करते समय अपने विवेक और सावधानी का उपयोग करें।

To Avail Personal LoanApply Now

Related Blogs.

15 July 2026

लोन को समय पर या उससे पहले चुकाने के फायदे: आपकी वित्तीय सेहत पर सकारात्मक प्रभाव

लोन कई वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का एक प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता समय पर पुनर्भुगतान में छिपी होती है। लोन को समय पर या उससे पहले चुकाने के फायदे केवल ऋण समाप्त करने तक सीमित नहीं हैं। इससे आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर हो सकता है, ब्याज लागत कम हो सकती है और भविष्य की वित्तीय योजनाओं को अधिक मजबूती मिल सकती है। चाहे आप नियमित EMI का भुगतान करें या लोन का प्रीपेमेंट करें, दोनों ही विकल्प आपकी वित्तीय सेहत को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

1 May 2026

रेमिटेंस क्या है रेमिटेंस का अर्थ

रेमिटेंस का अर्थ मान लीजिए नेहा मुंबई में काम करती है और हर महीने अपने परिवार को पैसे भेजती है। इसी प्रक्रिया को रेमिटेंस कहा जाता है, यानी एक स्थान से दूसरे स्थान पर पैसा भेजना। यह पैसा व्यक्ति, परिवार, बैंक या व्यवसाय को देश के अंदर या विदेश में भेजा जा सकता है। रेमिटेंस में इसे "धन प्रेषण" या "पैसा भेजना" कहते हैं। 

30 April 2026

रिवर्स रिपो दर क्या होती है और यह रेपो रेट से कैसे अलग होती है?

रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर जिस पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, वाणिज्यिक बैंकों से उनकी अतिरिक्त नकदी जमा करने पर उसके बदले ब्याज देता है। यह रेपो रेट से अलग होता है। यह वह दर है जिस पर बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से लोन लेते हैं। रिवर्स रेपो का इस्तेमाल अर्थव्यवस्था में पैसा कम करने के लिए किया जाता है, जबकि रेपो रेट का इस्तेमाल इसे नियंत्रित या बढ़ाने के लिए होता है।