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नो कॉस्ट ईएमआई क्या है?

नो कॉस्ट ईएमआई क्या है?

यह बैंक और वित्तीय संस्था द्वारा मिलने वाली एक बेहतर सुविधा है जो क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें उपयोगकर्ता को अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होता, जिससे इंटरेस्ट का भुगतान करने में परेशानी नहीं होती है। यह उन लोगों के लिए सही है जो नियमित भुगतान करते हैं। नो कॉस्ट ईएमआई आपको बचत और सुरक्षित भुगतान का तरीका प्रदान करता है। इसके माध्यम से आप आसानी से अपने वित्त को मैनेज कर सकते हैं।

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नो कॉस्ट ईएमआई का मतलब हिंदी में समझें

नो कॉस्ट ईएमआई यानी किसी अतिरिक्त ब्याज या शुल्क के ही सामान को मासिक किश्तों पर खरीदना है। इसमें उत्पाद की कुल कीमत को बराबर किश्तों में बांटा जाता है और आपको सिर्फ वस्तु का वास्तविक मूल्य चुकाना प़ड़ता है। यह योजना मुख्य रूप से बैंक, क्रेडिट कार्ड या फिर डेबिट कार्ड के माध्यम से मिलती है।

नो कॉस्ट ईएमआई कैसे काम करती है?

नो कॉस्ट ईएमआई एक ऐसी भुगतान सुविधा है, जिसमें ग्राहक किसी सामान की वास्तविक कीमत को बिना किसी अतिरिक्त ब्याज के समान मासिक किस्तों में चुकाते हैं। इसमें वस्तु की कुल कीमत को 3 से 12 महीने या फिर उससे अधिक समय में विभाजित कर दिया जाता है।

नो कॉस्ट ईएमआई के प्रमुख लाभ

इसके तहत खरीदार को सिर्फ वस्तु की मूल कीमत देनी होती है, यानी उसे कोई ब्याज नहीं देना होता है। इसके अलावा एक साथ बड़ी रकम देने के बजाय, आप छोटे किश्तों में भुगतान कर सकते हैं। इसके तहत महंगे स्मार्टफोन, टीवी, फ्रिज, या लैपटॉप भी बगैर किसी अतिरिक्त खर्च के खरीदे जा सकते हैं। आम तौर पर इसमें प्रोसेसिंग फीस भी नहीं लगती है।

नो कॉस्ट ईएमआई प्रक्रिया (How it Works)

ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन स्टोर पर सामान चुनते समय No Cost EMI ऑप्शन को चुनें। ध्यान रखें कि क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या बजाज फिनसर्व जैसे ईएमआई कार्ड का इस्तेमाल करें।

अपनी पसंद के अनुसार 3, 6, 9, 12, 18, या 24 महीने की किश्तें चुनें

भुगतान और छूट वास्तव में बैंक/विक्रेता ब्याज के बराबर राशि पहले ही छूट के रूप में कम कर देते हैं। फिर बची हुई राशि पर EMI लगती है।

नो कॉस्ट ईएमआई के फायदे और सीमाएं

नो कॉस्ट ईएमआई बिना एक्सट्रा ब्याज के बड़ी खरीदारी को छोटी मासिक किस्तों में बांटने की प्रक्रिया है। इसके फायदे ये हैं कि बिना ब्याज के खरीदारी, आसान भुगतान, और बजट प्रबंधन होता है।

नो कॉस्ट ईएमआई और साधारण ईएमआई में मुख्य अंतर

नो कॉस्ट ईएमआई और साधारण ईएमआई में मूल अंतर यह है कि नो कॉस्ट ईएमआई में आपको ब्याज नहीं देना पड़ता है। इसमें सिर्फ सामान की वास्तविक कीमत चुकानी होती है, जबकि ईएमआई में ब्याज और प्रोसेसिंग फीस भी शामिल होती है, जिससे उत्पाद महंगा पड़ता है। नो कॉस्ट ईएमआई में ब्याज की राशि को सेलर या ब्रांड डिस्काउंट के रूप में कम कर देता है।

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नो कॉस्ट ईएमआई पर आवेदन कैसे करें?

कॉस्ट ईएमआई पर ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करने के लिए, चेकआउट के समय "No Cost EMI" का विकल्प चुनें और अपना क्रेडिट/डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करें। यह 3-12 महीने की किश्तों में बगैर अतिरिक्त ब्याज के सामान खरीदने की सुविधा प्रदान करता है।

नो कॉस्ट ईएमआई के लिए पात्रता मानदंड

नो कॉस्ट ईएमआई के लिए आमतौर पर 18-60 वर्ष की आयु के भारतीय निवासी होना, एक वैध क्रेडिट/डेबिट कार्ड और अच्छा क्रेडिट स्कोर का होना बहुत जरूरी है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नो कॉस्ट ईएमआई में कोई छुपा शुल्क होता है?

नो कॉस्ट ईएमआई पूरी तरह से मुफ्त नहीं बल्कि इसमें आमतौर पर छुपे हुए शुल्क होते हैं। बैंक या फाइनेंस कंपनियां 99 रुपये से लेकर 299 रुपये या इससे भी अधिक की प्रोसेसिंग फीस ले सकती हैं।

भले ही ब्याज शून्य हो लेकिन बैंक ब्याज की गणना करते हैं और उस पर 18 प्रतिशत GST वसूलते हैं। इसके अलावा नो-कॉस्ट ईएमआई ज्यादातर उन प्रोडक्ट पर मिलती है जिन पर नकद छूट उपलब्ध नहीं होती है। वहीं, कुछ मामलों में नो-कॉस्ट ईएमआई में बदलने के लिए अन्य शुल्क लगने की भी संभावना रहती है। साथ ही, समय पर ईएमआई न चुकाने पर जुर्माना और ब्याज भी लगता है।

क्या बिना क्रेडिट कार्ड के भी नो कॉस्ट ईएमआई मिल सकती है?

बिना क्रेडिट कार्ड के भी नो कॉस्ट ईएमआई की सुविधा मिलती है।

नो कॉस्ट ईएमआई का लाभ कैसे मिलता है?

नो कॉस्ट ईएमआई का लाभ उठाने के लिए आप किसी सामान की कुल कीमत का भुगतान बिना किसी अतिरिक्त ब्याज के ही समान मासिक किश्तों में कर सकते हैं। इसके लिए, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या बजाज फिनसर्व जैसे फाइनेंस कार्ड का इस्तेमाल किया जाता है।

क्या नो कॉस्ट ईएमआई में प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर शुल्क लगता है?

नो कॉस्ट ईएमआई में समय से पहले लोन बंद करने पर अक्सर शुल्क लगता है।

अगर मैं ईएमआई चुकाने में देर कर दूं तो क्या होगा?

नो कॉस्ट ईएमआई में देरी करने पर आपको लेट फीस, दंड ब्याज और क्रेडिट स्कोर में गिरावट का सामना करना होगा। बैंक आम तौर पर ईएमआई का 1 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक जुर्माना लगा सकते हैं।

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